नातान ने दाऊद को फटकार लगाई कि उसने परमेश्वर के वचन को ठुकराते हुए ऊरिय्याह की हत्या करवाई ताकि वह बेतशेबा से विवाह कर सके और उसने दाऊद के इस भयानक पाप के विरुद्ध उसके प्रत्येक अपराध के लिए सजा भी सुनाई।

क्षमा का मतलब पाप के परिणामों से छुटकारा नहीं होता। अगर पश्चाताप करने से उसके परिणाम से छुटकारा हो जाता तो न्याय का कोई आधार ही नहीं रह जाएगा। तो फिर यह सवाल उठता है – मैं उस ग़म को कैसे मिटाऊँ? उन परिणामों का सामना करने के लिए मुझे बल कैसे मिलेगा? आइए हम अपने अध्यन में आगे बढ़े – रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद, जब दाऊद का मुखौटा उतर गया, तब फिर आगे क्या हुआ?


Nathan rebuked David for despising the word of the Lord in killing Uriah so that he could marry Bathsheba, and he also pronounced a sentence for each of his sins against Uriah and Bathsheba.

Forgiveness does not mean the removal of the consequences of sin. If consequences were eliminated by a simple act of repentance, then justice would become ineffective. Then the questions remains – How can I erase the guilt? How do I find courage and strength to deal with the consequences? Let’s continue with our story – as David is caught red-handed – and what happened next after his camouflage wore off!